History Of mandar

Mandar is located in Sirohi District of Rajasthan and near the border of Gujrat, the culture of Mandar is centuries old and some of the Grantha and Puraan say that the Jain Mandir in Mandar is built more than 1200 years earlier.

Mulnayak: Nearly 120 cms high,white-colored idol of Bhagawan Mahavir Swami in the Padmasana posture.History of mandar
 
Tirth: Mandar village is a place of pilgrims and every street and road are the It is in a street of temples in the Mandar village.

History of City: There is a reference to this village in the list of the members of the committee appointed for the annual function of Abu - Delwada in the year 1287 of the Vikram era. This temple is mentioned in the Tirthmala composed by Poet Megh in the year 1499 of the Vikram era. It seems that his temple was buried in an earthquake. The large idols of Bhagawan Parshvanath and Bhagawan Vimalnath in the Kayotsarga posture were found from the hollow of a ground near a hill outside the village.

This temple was renovated and this ancient extraordinary idol was reinstalled in the year 1920 of the Vikram era. Many ruins of buildings outside the village reveal that this was a large city of many temples. Inscriptions also state that rich merchants of this place participated in many religious activities.

A flag is hoisted on the thirteenth day of the bright half of the month of Magh.Other Temples: Besides this, there is an old temple of Bhagawan Dharmanath.

Works of art and Sculpture: Found while digging, these ancient idols are beautiful, impressive and delightful.

How to Reach Mandar: The nearest railway station of Abu Road is at a distance of 50 kilometers from here. Bus service and private vehicles are available. Boarding and lodging provisions are there.

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अहमदाबाद शहर में आयोजित मुमुक्षु श्री भँवरलाल जी दोशी के भव्य दीक्षा समारोह में सस्नेह सादर आमन्त्रण
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आदरणीय सा धार्मिक बन्धुओं
सादर जय जिनेन्द्र
जैसा कि आप सभी को विदित ही हैं कि मुमुक्षु श्री भंवरलाल जी दोशी के दीक्षा समारोह निमित आगामी 29,30 एंव 31 मई 2015 को अहमदाबाद में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होने निर्धारित हैं, श्री भंवरलाल जी दोशी इस भौतिक एंव अंधियारे जगत को अलविदा कह कर संयम व आध्यात्म के अदभुत संसार में बसने जा रहे हैं, तो हमें संयम पथ के इन पथिकजी को विदाई देने व उनकी दीक्षा की अनुमोदना करने हेतु अहमदाबाद के दीक्षा समारोह में अवश्य पहुंचना हैं, सभी बन्धुओं से निवेदन हैं कि इस दीक्षा समारोह में हमें सिर्फ और सिर्फ कुर्ता-पायजामा जैसे ट्रेडिशनल पहनावे के साथ ही पहुंचना हैं, कृपया ध्यान रहें कि जीन्स- टी शर्ट आदि वेस्टर्न पहनावे की बजाय कुर्ता-पायजामा जैसे परम्परागत पहनावे में शामिल होने से संयम व सादगी की भावना पुष्ट होगी व दीक्षा समारोह की गरिमा बढ़ पाएगी, कृपया यह सन्देश आपके परिचितों, मित्रों,स्नेही जनों तक ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचाएं।

=[]= त्रि दिवसीय दीक्षा कार्यक्रम =[]=
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=[]=शुक्रवार 29 मई 2015=[]=
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प्रात 7-30 बजे
गुरु भगवंतों के मंगल प्रवेश निमित सोमैया
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दोपहर 2-30 बजे
कपड़ें रंगने का कार्यक्रम
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सांय 7 बजे
सुप्रसिद्ध 108 कलाकारों द्वारा संगीत की अदभुत स्वरलेहरी
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=[]= शनिवार 30 मई, 2015 =[]=
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प्रात:7,30 बजे
भव्यतम एंव अद्वितीय वर्षी दान वरघोड़ा
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दोपहर 4 बजे
अंतिम व्याना
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सांय 7 बजे
विदाई समारोह
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=[]= रविवार, 31 मई, 2015 =[]=
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प्रात:5.30 बजे
दीक्षा विधी प्रारम्भ
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=:=दीक्षा समारोह स्थल=:=
अहमदाबाद एज्युकेशन सोसायटी ग्राउंड,अडानी CNG पम्प के निकट,
हेल्मेट सर्कल, 132 फिट रोड
अहमदाबाद (गुजरात)