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संघवी श्री भंवर लाल जी रघुनाथमल जी दोशी

जैन धर्म एक सत्य-अहिंसा स्वरुप शाश्वत परम पवित्र आध्यात्मिक परिणत धर्म है | सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक चारित्र ये तीन जैन धर्म के मूलाधार है | इन तीनों की एकता ही मोक्ष मार्ग का रास्ता दिखाती है | सत्य और परिपूर्ण अहिंसा रूप आचरण ही इस धर्म का मूलान्त है. भगवान सर्वज्ञ, वीतरागी और हितोपदेशी है | संसार का प्रत्येक प्राणी अपने भाग्य का स्वयं विधाता है और अपने अच्छे बुरे कर्मो का फल स्वयं ही भोगता है | संसार का प्रत्येक पदार्थ प्रकृति द्वारा सृजित एवं विसर्जित है और इसका कोई कर्ता-हर्ता नही है विश्व के समस्त भव्य आत्माओं मे परमात्मा बनने की शक्ति है | मनुष्य का कर्म सिर्फ जन्म लेना ही नहीं है | मानव सभ्यता के इतिहास में कई महापुरूषों ने जन्म लिया, जिन्होंने अपने अदमय साहस और सूझबूझ से विपरीत परिस्थितियों में भी सराहनीय कार्य किये | ऐसे ही एक प्रेरणादायक श्रोत है संघवी श्री भवरलालजी रघुनाथमलजी दोशी जिनका जन्म राजस्थान की पावन धरती पर बसे मंडार गांव में 26 मई 1956 को संघवी रघुनाथमलजी और असूबेन के प्रांगण में हुआ था | बचपन से ही वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे और छोटे से छोटे कार्यों में उनकी सोच और लगन विस्मयकारी थी | शिवगंज नगर में प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सिरोही कॉलेज से स्नातक सन् 1974-1975 में किया. और इसके बाद C.A की शिक्षा के लिए उन्होंने बॉम्बे का रुख किया | परंतु मेधावी छात्र होने के बाद भी पिता के आदेश पर वे बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी आगे की शिक्षा के विचार को त्यागकर परिवारिक परिस्थिति वश वापस आ गए | उन्होंने दसवीं कक्षा में कल्चर प्रोग्राम के राज्य स्तर में हिस्सा लिया | वे कॉलेज में लगातार 3 वर्ष कल्चर प्रोग्राम के लिडर रहे और उन्होने अनेक कार्यों में भी भाग लिया | जैसे संगीत, मोनो एक्टिंग, Mock Parliament, नाटक. फिर कॉलेज के यूनियन के वेलफेयर मिनिस्टर बने एंव इलेक्शन में कॉर्मस प्रेसिडेंट के चुनाव लड़े | सिरोही में सबसे अच्छे विद्यार्थी के रूप में माने गए |

इस बीच में सन् 1977 में उनका विवाह शिवगंज में कार्यरत मंडार निवासी श्री जैतमलजी देवीचंदचौधरी की सुपुत्री मधुबेन सेसंपन्न हुआ . अपने परिवारिक दायित्वों का निर्वाह करने और आर्थिक स्थिति को सुदृड़ बनाने के लिए व्यवसाय हेतु विभिन्न शहरों में काम कर प्रशिक्षण एंव अनुभव प्राप्त किया. तत्पश्चात् उन्होंने एक पेपर के व्यवसाय में डेढ वर्ष तक अनुभव हासिल किया | फिर एक समय ऐसा आया जब उन्होंने दिल्ली में अपना व्यवसाय आरंभ किया और आज प्लास्टिक की दुनिया के सिरमौर है | इसके साथ ही सत्य-संगठन-सदाचार एवं शाकाहार संघवी के साथ पदानुसार अपने कर्तव्य का पालन तथा पुरूषार्थ करना उनका परम्परागत धर्म था. श्री चंद्रशेखर महाराज साहिब के मात्र दो प्रवचन से प्रभावित होकर उनकी रूचि जैनधर्म के प्रति बढ़ी | 1982 में साध्वी जी श्री जसवंत जी महाराज साहिब एंव उनके शिष्य प्रगुणा श्री जी महाराज साहिब एवं प्रिय धर्माश्री जी महाराज साहिब दवारा जिनवाणी का श्रवण कर चर्तुमास में वेराग्य वासित हुए अपनी आत्मा के कल्याण के प्रति जागरूक हुए | दिल्ली में गुरू भगवंतो का समाराम न होने के कारण वे अपने व्यवसाय एंव गृहस्त जीवन की व्यवस्था में व्यस्त होकर संसार के मोह में फंसकर भौतिक वाद की तरफ आगे बढते रहे | बहुत ही कम समय में अपने व्यवसाय के अंदर शिर्षस्थ स्थान पर पहुंचकर पूरे भारत में प्लास्टिक ट्रेड एंव इंडस्ट्री में एक अहम प्रतिष्ठा स्थापित की | उन्होंने बहुत ही कम समय में अपनी युवा अवस्था में व्यापार के साथ- साथ सामाजिक एंव धार्मिक संस्थाओं के साथ जुड़कर आपने जिन शासन की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त किया. उसमें विशेषकर दिल्ली में सर्व प्रथम मंडार जैन संघ दिल्ली की स्थापना करवाई एंव अपने नेतृत्व में श्री सुमतिनाथ प्रभु के शिखरबद्ध जिन मंदिर का निर्माण करवाया |

यदि हम एक साधारण व्यक्ति की बात करें तो इतना कुछ काफी था. श्री भंवरलाल दोशी जी बचपन से ही धार्मिक संस्कार के धनी रहे है. हमें श्री भंवरलाल दोशी के व्यक्तित्व को समझने के लिए परिकल्पना करनी पड़ेगी | सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा भक्ति. भक्त को भगवान, जीव को शिव और आत्मा को परमात्मा बना सकती है | हमारे अंतर के मलिन भावों को ध्वस्त करके एकता और समरसता के सूत्र में बंधने की अत्यंत आवश्यकता है | ऐसी ही साधना की शुरूआत भंवरलालजी दोशी के परिवार द्वारा निकाली गई छ:रि पालित संघ से हुई थी | विगत 10 वर्षों से भी ज्यादा समय से कम से कम बियसणा पच्चखान एवं अन्तमी अष्टमी वच उदय पर उपवास आदि अपने पर्व पर्युषण के दौरान अठाई तप 64 प्रहर के पौषध के साथ करते रहे है | मूल विधि से उपधान तप सिद्धि तप इत्यादि अनेक तप आपने किये है उनके लिए तो आर्थिक सफलता एकमात्र पहलु था | परमपिता परमेश्वर ने तो उनका चयन किसी और कार्य के लिए किया था | इनके कार्यकलापों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि गुरू के निर्देशों को समझना और उनके कार्यों को संपन्न करना उन्होंने अपनी नियति बना ली है और इसका लाभ मंडार को हीन ही बल्कि कई अन्य क्षेत्रों को मिला. उनके परिवार ही नही बल्कि सारे कुटुंब ने उनके हर संकल्प को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास किए | तो आइए डालते है एक नजर उनके द्वारा किये गए कार्यों एंव उपलब्धियों पर जो निश्चित रूप से जिनाज्ञा से प्रेरित होकर किए गए है | अपने परिवार द्वारा तीन बहुत बड़े-बड़े ऐतिहासिक अनुष्ठान, जैसे 31 दिन का मंडार से शंखेश्वर पालीताणा का ऐतिहासिक 1400 लोगों का छ:रिपालक संघ, शंखेश्वर महातीर्थ में 1700 लोगों का उपधान तप एंव पालिताणा शत्रुंजय गिरीराज की सिद्धवड़ से 1700 यात्रियों को नवाणु यात्रा करवाकर इतिहास बनाया |

इसके अलावा पिछले 10 से 15 वर्षो से निम्न तीर्थ ट्रस्टों में अपना योगदान एंव नेतृत्व प्रदान करके अपनी सेवा देते आ रहे है |

1. श्री जीरावला पार्श्वनाथ जैन तीर्थ ट्रस्ट : महासचिव

2. श्री हस्तीनापुर जैन श्वे. तीर्थ ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एंव निर्माण समिति के अध्यक्ष

3. श्री अयोध्या एंव रतनपुरी जैन श्वेताम्बर तीर्थ ट्रस्ट : ट्रस्टी

4. श्री मंडार जैन संघ, मंडार एवं श्री वरमाण तीर्थ : अध्यक्ष

5. श्री मंडार जैन संघ दिल्ली : अध्यक्ष

6. श्री चितामणी पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर तीर्थ ट्रस्ट हरिद्वार : उपाध्यक्ष

7. श्री जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक तीर्थ रक्षा समिती : उपाध्यक्ष

8. श्री जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ-उत्तरी भारत जोन : चैयरमैन

9. श्री जैन महासभा दिल्ली (चारोसमुदाय- दिगंबर, तेरापथ, स्थानक एंव श्वेताम्बर मूर्ति पूजक की सामूहिक संस्था ) : अध्यक्ष

10. श्री वल्लभ स्मारक शिक्षण निधी ट्रस्ट : मुख्य संरक्षक

11. श्री महावीर मेमोरियल संस्था : लाइफट्रस्टी

12. अखिल भारतीय जैन स्वेतामम्बर मु. पु. युवक महासंघ के संस्थापक महासचिव के रूप में ६ साल तक अपनी सेवाएं प्रदान की |

उनके अतिरिक्त भी अनेक संस्थाओं के साथ जुड़कर तनमन और धन से सहयोग देते रहे है ।

(1) इनके शीर्षस्थ नेतृत्व में अनेको कार्य सम्पन्न हुए जो जीवन के यादगार क्षणों में रहेंगे उसमे श्री दिल्ली के श्री मंडार जैन संघ दिल्ली कागठन एवं श्री सुमतिनाथ भगवान का शिखरबद्ध जिनालय का निर्माण |

(2) श्री हस्तिनापुर श्वे तीर्थ में 225 रूम की एक विशाल एवं नूतन धर्मशाला का निर्माण करवाना |

(3) श्री अयोध्या तीर्थ में अंजनश्लाका एवं प्रतिष्ठा का संयोजन करवाना |

(4) श्री हस्तिनापुर में 150 फीट ऊंचे अष्टापद जी मंदिर के अधूरे कार्य को पूर्ण करवाकर उसकी अंजनश्लाका एवं प्रतिष्ठा करवाना |

(5) श्री वरमाण जैन तीर्थ का सम्पूर्ण के जीर्णोद्धार करवाना एवं उसकी अंजनश्लाका एवं प्रतिष्ठा करवाना |

(6) श्री सातसेन तीर्थ के सम्पूर्ण जीर्णोद्धार करवाना एवं उसकी एवं प्रतिष्ठा करवाना |

(7) श्री मंडार गांव में श्री महीवीर स्वामी जी मदिर की अंजनश्लाका एवं प्रतिष्ठा |

(8) श्री शीतलनाथ जी मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सुमतिनाथ भगवान की दो देहरियों का निर्माण एवं प्रतिष्ठा करवाना |

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अहमदाबाद शहर में आयोजित मुमुक्षु श्री भँवरलाल जी दोशी के भव्य दीक्षा समारोह में सस्नेह सादर आमन्त्रण
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आदरणीय सा धार्मिक बन्धुओं
सादर जय जिनेन्द्र
जैसा कि आप सभी को विदित ही हैं कि मुमुक्षु श्री भंवरलाल जी दोशी के दीक्षा समारोह निमित आगामी 29,30 एंव 31 मई 2015 को अहमदाबाद में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होने निर्धारित हैं, श्री भंवरलाल जी दोशी इस भौतिक एंव अंधियारे जगत को अलविदा कह कर संयम व आध्यात्म के अदभुत संसार में बसने जा रहे हैं, तो हमें संयम पथ के इन पथिकजी को विदाई देने व उनकी दीक्षा की अनुमोदना करने हेतु अहमदाबाद के दीक्षा समारोह में अवश्य पहुंचना हैं, सभी बन्धुओं से निवेदन हैं कि इस दीक्षा समारोह में हमें सिर्फ और सिर्फ कुर्ता-पायजामा जैसे ट्रेडिशनल पहनावे के साथ ही पहुंचना हैं, कृपया ध्यान रहें कि जीन्स- टी शर्ट आदि वेस्टर्न पहनावे की बजाय कुर्ता-पायजामा जैसे परम्परागत पहनावे में शामिल होने से संयम व सादगी की भावना पुष्ट होगी व दीक्षा समारोह की गरिमा बढ़ पाएगी, कृपया यह सन्देश आपके परिचितों, मित्रों,स्नेही जनों तक ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचाएं।

=[]= त्रि दिवसीय दीक्षा कार्यक्रम =[]=
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=[]=शुक्रवार 29 मई 2015=[]=
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प्रात 7-30 बजे
गुरु भगवंतों के मंगल प्रवेश निमित सोमैया
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दोपहर 2-30 बजे
कपड़ें रंगने का कार्यक्रम
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सांय 7 बजे
सुप्रसिद्ध 108 कलाकारों द्वारा संगीत की अदभुत स्वरलेहरी
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=[]= शनिवार 30 मई, 2015 =[]=
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प्रात:7,30 बजे
भव्यतम एंव अद्वितीय वर्षी दान वरघोड़ा
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दोपहर 4 बजे
अंतिम व्याना
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सांय 7 बजे
विदाई समारोह
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=[]= रविवार, 31 मई, 2015 =[]=
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प्रात:5.30 बजे
दीक्षा विधी प्रारम्भ
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=:=दीक्षा समारोह स्थल=:=
अहमदाबाद एज्युकेशन सोसायटी ग्राउंड,अडानी CNG पम्प के निकट,
हेल्मेट सर्कल, 132 फिट रोड
अहमदाबाद (गुजरात)